Thu Mar 17 2022
3 years ago
रंगों के पर्व को मनाने का एक अनोखा रूप होती है बैठकी होली
इसमें कलाकार एक जगह एकत्रित होकर उमंग व तरंग से भरे होली के पारंपरिक गीत गाते हैं। इन कलाकारों को होलीयार कहते हैं। ये लोकगीत कुमाऊंनी अथवा हिन्दी भाषा में गाए जाते हैं। उत्तराखंड के चम्पावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा एवं नैनीताल जनपदों में बैठकी होली बहुत प्रचलित है। इनके गीतों में हारमोनियम व तबला जैसे संगीत वाद्यों का भी विशेष महत्व होता है।
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