कैंसर एक जटिल और विषम प्रकार के रोगों का समूह है, जिसकी विशेषता अनियंत्रित कोशिका वृद्धि है और जो अक्सर मेटास्टेसिस तक पहुंच सकता है।
प्रारंभिक शोध में DdpMPyPEPhU को स्तन कैंसर के लिए एक आशाजनक एंटीकैंसर अवरोधक के रूप में पहचाना गया है।
दवा खोज और विकास की प्रक्रिया को तेज करने के लिए इस परियोजना में उन्नत इन-सिलिको पद्धतियों का उपयोग किया जाएगा, ताकि पहले से उपलब्ध स्तन कैंसर दवाओं और विकसित उम्मीदवार DdpMPyPEPhU का तुलनात्मक पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन किया जा सके।
इसमें मॉलिक्यूलर डॉकिंग, DFT, WaterMap, MD सिमुलेशंस, MMGBSA तथा बाइंडिंग एफिनिटी प्रेडिक्शन्स जैसी तकनीकों का उपयोग शामिल है।
इसके अतिरिक्त, नई यौगिक संरचनाओं के डिज़ाइन और निर्माण को बेहतर बनाने के लिए एआई-आधारित ड्रग एन्यूमरेशन तकनीकों का विकास करने की योजना है, ताकि उपयुक्त भौतिक-रासायनिक गुण, बेहतर बाइंडिंग एफिनिटी और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
ये कम्प्यूटेशनल पद्धतियां दवा खोज की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और क्लिनिकल ट्रांसलेशन के लिए लीड कंपाउंड्स के अनुकूलन में सहायता करेंगी।
सिंथेटिक केमिस्ट्री टीम के सहयोग से DdpMPyPEPhU तथा इसके अनुकूलित एनालॉग्स का संश्लेषण और विशेषण किया जाएगा, जिसमें NMR स्पेक्ट्रोस्कोपी, मास स्पेक्ट्रोमेट्री, TLC और FT-IR जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
इसके बाद AIIMS की बायोकैमिस्ट्री टीम कई स्तन कैंसर सेल लाइनों पर इन-विट्रो सत्यापन करेगी और परिणामों की तुलना मानक नियंत्रण दवाओं से की जाएगी। जो उम्मीदवार यौगिक महत्वपूर्ण एंटीकैंसर गतिविधि दिखाएंगे, उनका इन-विवो सत्यापन किया जाएगा ताकि उनके चिकित्सीय उपयोग की संभावना का आकलन किया जा सके।